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भारत का सामाजिक धार्मिक संतुलन


    भारत का समाज संस्कृतियों का समुच्चय है।मानव सभ्यता के विकास के साथ ही भारत ने संस्कृतियों को सहेजना शुरू कर दिया था।अतिप्राचीन और अतिनवीन संस्कृतियों को आज भी संजों कर रखा हुआ है।सिंधु काल से ही आर्थिक समाज जातीय व्यवस्था में बदलने शुरू हो गए थे ।तब मनुष्य की जनसँख्या इतनी कम हुआ करती थी कि एक मानव समूह हमेशा अपने जनसँख्या विस्तार के लिए दूसरे मनुष्य को अपने समूह में मिलाने के लिये तत्पर रहता था।इस समय किसी भी दृष्टि से एक समूह से दूसरे समूह में मिलना आसान था।

            बाद के काल में विद्वत समूह ने अपने को  जाति में संगठित करना शुरू किया । इसके पहले विद्वानों की श्रेणी हुआ करती थी । बाद में इस श्रेणी ने अपने समाज को जाति का रूप दिया । जिसका अनुगमन हर श्रेणियो ने किया । चूँकि यह  इस वर्ग की समाज में प्रतिष्ठा जाती रही। जल्द ही नए दर्शन का प्रतिपादन हुआ जिसे बौद्ध दर्शन के नाम से जाना जाता है।इस समय तक ब्राह्मण जाति के रूप में संगठित होकर काफी प्रभावशाली हो गए थे इसलिए बौद्ध धर्म के उत्थान से बहुत आहत हुए।अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा,अपने आन बान और सर्वोच्च अधिकार को पाने के लिये निरंतर प्रयास करते रहे ।पुष्यमित्र शुंग ने 184 ईस्वी पूर्व में वृहद्रथ की हत्या करके ,ब्राह्मण प्रतिष्ठा की स्थापना करके इस वर्ग को समाज में पुनः स्थापित किया ।

                चूँकि नए दर्शन का प्रतिपादन करके ,नए साहित्य की रचना करके ,शिक्षा संस्थानों की स्थापना करके लोगो ने ब्राह्मण वर्ग को चुनौती दी थी ।इसलिए यह आवश्यक था कि लोगो को दर्शन ,शिक्षा ,साहित्य से वंचित कर दिया जाय और तर्कशीलता से रूढ़िवादिता की ओर ले जाया जाय ।यही से भारत में जातीय गुलामी का दौर शुरू होता है जिसने भारत के सामाजिक संतुलन और एकता को छिन्न भिन्न कर दिया ,इसके बाद निम्न परिवर्तन हुए ।

    1..ब्राह्मण वर्ग ने अपने को समाज में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया ।साहित्य में इन्हें देवतूल्य माना गया ।

    2..भारत का समाज तर्कशील एवं प्रगतिशील था आसानी से रूढ़िवादिता की ओर जाने वाला नहीं था इसके लिए बल प्रयोग की भी जरुरत थी।इसलिए ब्राह्मण-क्षत्रिय गठजोड़ बना ।

     3..पुष्यमित्र शुंग के बाद ,पहले एवं बाद के साहित्य में अंतर हो गया ।
       बाद का साहित्य तर्क एवं अनुसन्धान पर न होकर मान्यताओं पर लिखा जाने लगा ।

      4..आर्थिक एवं सांस्कृतिक समूहों को जातीय आधार दिया जाने लगा एवं जातियो को रूढ़िवादी बनने के लिये प्रेरित किया गया ,बल प्रयोग भी किया जाने लगा ।

      5..और अंत में नारकीय स्थिति तब हो गयी जब मानव द्वारा मानव पर प्रतिबन्ध लगाया जाने लगा ।
 
          जैसे- शिक्षा ग्रहण करने पर प्रतिबन्ध,
                   हथियार रखने पर प्रतिबन्ध,
                   अच्छे कपड़े पहनने पर प्रतिबन्ध,
                   शिक्षा देने पर प्रतिबन्ध,
                   स्थायी जमींन रखने पर प्रतिबन्ध,
                  
       इस प्रकार आर्थिक सांस्कृतिक समूहों का जातीयकरण और जातीयकरण से जातीय गुलामी की ओर समाज बढ़ने लगा ।
          जातीय गुलामी इस समाज की सबसे विकृत अवस्था थी जिसमे एक जाति दूसरे जाति द्वारा गुलाम बना ली गयी और समस्त मानव अधिकारों से वंचित कर दी गयी ।इसके बाद भारत सदियों तक गुलाम बना रहा ।कमजोर से कमजोर आक्रांता भी इस समाज को जीतता और लूटता रहा ।

       95 प्रतिशत जनता को इस अवस्था में पहुँचा दिया गया कि वह सामाजिक परिवर्तनों में भाग लेने के लायक ही नहीं रह गयी थी निरंतर प्रहार से उनकी बुद्धि एवं चिंतन शक्ति को कुंद कर दिया गया ।इसका परिणाम क्या हुआ -राजा कोई भी हो इनकी दयनीय स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला था इसलिए जनता ने ध्यान ही नहीं दिया कि कौन उनका राजा है और कौन उनका राजा होना चाहिये ।

        आइये इसे आधुनिक सन्दर्भ में समझने का प्रयास किया जाय ।मान लीजिये  5 प्रतिशत लोगों को छोड़कर समाज के अन्य लोगों के शिक्षा ग्रहण करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाय , शासन में भाग लेने से वंचित कर दिया जाय  तो क्या होगा --जरा सोचिये और विचार कीजिये .....

     1..नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व इस देश को नहीं मिलेगा ।

     2..कुछ समझदार लोग देश छोड़कर भाग जायेंगे।

     3..कुछ लोग लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त करेंगे ।

     4..कुछ लोग चुप चाप बिना प्रतिरोध किये गुलामी
          का जीवन जीने लगेंगे ।

     5..कुछ लोग अन्य धार्मिक समूहों का आश्रय लेकर 
          संघर्ष करेंगे ।

          विचार कीजिये  और क्या क्या प्रभाव पड़ सकते
           सकते है ?और इसका दूरगामी प्रभाव क्या
           पड़ हो सकता है ?

     आगे के सामाजिक परिवर्तन में इस आधार की महत्वपूर्ण भूमिका थी लेकिन समस्या बढ़ी कि कम हुई आगे विश्लेषण जारी रहेगा ।

                                आगे क्रमशः जारी....

     राजेश वर्मा
     निचलौल,महाराजगंज,
     उत्तर प्रदेश , भारत
                 
                  
             
     

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