कितने मुक्त हुए हम जातिवाद से?
जाति की उत्पत्ति निर्विवाद नहीं है,लेकिन जातिवाद से होने वाला नुकसान निर्विवाद है।
पुरातन काल में जातियां एक कौम की तरह व्यवहार करती थी।पहले पहल यह भले ही रूढ़ि न रहा हो लेकिन बाद में 95 प्रतिशत जनता जातिय गुलामी की ओर चली गयी ।जातिय गुलामी मतलब, इनको पढने लिखने का अधिकार नहीं था ,ये धन का संचय नहीं कर सकते थे ,इनके साथ अमानवीय व्यवहार भी उचित माना जाता था।सबसे बड़ी बात कि इनको भूमि का स्वामी नहीं माना जाता था ।जब चाहे भूमि से बेदखल कर दिया जाता था ।
इसका परिणाम यह हुआ कि,चाहे शासन विदेशी राजा का हो या फिर देशी राजा का ,इनके अमानवीय दशा में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला था । 5 प्रतिशत जनता देश की रक्षा नहीं कर पायी और 95 प्रतिशत जनता रक्षा करने के लायक नहीं थी क्योंकि इनको हथियार उठाने का अधिकार ही नहीं था।
यही कारण है कि भारत सदियों तक गुलाम रहा ।
अब छुआछूत जैसी कुप्रथा समाप्त हो गयी है लेकिन जातिवाद आज भी हावी है ,बुद्धिमान लोग इसे बढ़ाने में लगे हुए हैं ।
जातिवाद का असर अब धीरे धीरे सामाजिक जीवन में कम हो रहा है लेकिन राजनीति में यह बढ़ा ही है ।राजनीति और प्रशासन में जिस जाति के लोगो का प्रभुत्व ज्यादा होगा वह जाति समाज में ज्यादा प्रभावी होगी ।इस प्रवृत्ति ने राजनीति के स्तर को बहुत नीचे गिरा दिया है ।राजनीति में जातिवाद ,भ्रष्टाचार,दबंगई,गुंडागर्दी,तुष्टिकरण,आदि बूराइयों ने जड़ जमा लिया है।
आज जरुरत है पिछली प्रवृत्तियों एवम् बूराइयों से मुक्त होकर एक नए सामाजिक राजनितिक संरचना खड़ा करने की जिससे मानव सिर्फ और सिर्फ मानवीय गुणों से परिपूरित हो ।
राजेश वर्मा
निचलौल ,महाराजगंज ।
जाति की उत्पत्ति निर्विवाद नहीं है,लेकिन जातिवाद से होने वाला नुकसान निर्विवाद है।
पुरातन काल में जातियां एक कौम की तरह व्यवहार करती थी।पहले पहल यह भले ही रूढ़ि न रहा हो लेकिन बाद में 95 प्रतिशत जनता जातिय गुलामी की ओर चली गयी ।जातिय गुलामी मतलब, इनको पढने लिखने का अधिकार नहीं था ,ये धन का संचय नहीं कर सकते थे ,इनके साथ अमानवीय व्यवहार भी उचित माना जाता था।सबसे बड़ी बात कि इनको भूमि का स्वामी नहीं माना जाता था ।जब चाहे भूमि से बेदखल कर दिया जाता था ।
इसका परिणाम यह हुआ कि,चाहे शासन विदेशी राजा का हो या फिर देशी राजा का ,इनके अमानवीय दशा में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला था । 5 प्रतिशत जनता देश की रक्षा नहीं कर पायी और 95 प्रतिशत जनता रक्षा करने के लायक नहीं थी क्योंकि इनको हथियार उठाने का अधिकार ही नहीं था।
यही कारण है कि भारत सदियों तक गुलाम रहा ।
अब छुआछूत जैसी कुप्रथा समाप्त हो गयी है लेकिन जातिवाद आज भी हावी है ,बुद्धिमान लोग इसे बढ़ाने में लगे हुए हैं ।
जातिवाद का असर अब धीरे धीरे सामाजिक जीवन में कम हो रहा है लेकिन राजनीति में यह बढ़ा ही है ।राजनीति और प्रशासन में जिस जाति के लोगो का प्रभुत्व ज्यादा होगा वह जाति समाज में ज्यादा प्रभावी होगी ।इस प्रवृत्ति ने राजनीति के स्तर को बहुत नीचे गिरा दिया है ।राजनीति में जातिवाद ,भ्रष्टाचार,दबंगई,गुंडागर्दी,तुष्टिकरण,आदि बूराइयों ने जड़ जमा लिया है।
आज जरुरत है पिछली प्रवृत्तियों एवम् बूराइयों से मुक्त होकर एक नए सामाजिक राजनितिक संरचना खड़ा करने की जिससे मानव सिर्फ और सिर्फ मानवीय गुणों से परिपूरित हो ।
राजेश वर्मा
निचलौल ,महाराजगंज ।
Comments
Post a Comment