मैं भारत भूमि को भारत का निवासी होने के नाते इसे शत्-शत् नमन करता हूँ। भारत देश मेरी अन्तरात्मा की तरह है। मैं इसे आत्मसात कर युगों युगों तक इसमें विलिन हो जाना चाहता हूँ।
जहाँ तक मैंने भारत को समझा और विचार किया कि इस देश को भारत माता क्यों कहा जाता है शायद दुनिया में यही एक अनोखा देश है जिसने विश्व में पैदा होने वाली अनेक संस्कृतियों को अपने आँचल में संजों के रखा है और इस देश में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों ने बराबर का सम्मान पाया है। ठीक उसी तरह जैसे एक माँ अपने सभी बच्चों को बराबर का प्यार दुलार देती है। विश्व की क्रूरतम संस्कृतियों ने इस देश में स्थान पाया और देश के हरियाली आँचल में पलकर उनकी क्रूरता पर प्रेम का आवरण चढ़ा और उनकी संस्कृति ने महानता को ग्रहण किया।
ऐसे महान भारत भूमि को मेरा शत् शत् नमन् ।
राजेश वर्मा
निचलौल।
जहाँ तक मैंने भारत को समझा और विचार किया कि इस देश को भारत माता क्यों कहा जाता है शायद दुनिया में यही एक अनोखा देश है जिसने विश्व में पैदा होने वाली अनेक संस्कृतियों को अपने आँचल में संजों के रखा है और इस देश में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों ने बराबर का सम्मान पाया है। ठीक उसी तरह जैसे एक माँ अपने सभी बच्चों को बराबर का प्यार दुलार देती है। विश्व की क्रूरतम संस्कृतियों ने इस देश में स्थान पाया और देश के हरियाली आँचल में पलकर उनकी क्रूरता पर प्रेम का आवरण चढ़ा और उनकी संस्कृति ने महानता को ग्रहण किया।
ऐसे महान भारत भूमि को मेरा शत् शत् नमन् ।
राजेश वर्मा
निचलौल।
Comments
Post a Comment